ग्वालियर
भारत की नारी शक्ति को बचाना है। शारीरिक रूप से कमजोर होने से और लगाम लगानी है। भय दिखा कर शल्य प्रक्रिया से प्रसव करने वाले लालची डॉक्टरों पर। जब बच्चे पैदा होने से रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने कई दवाएं कई तरीके खोज लिए तो पूर्व की तरह प्राकृतिक रूप से प्राकृतिक अंगों से बच्चे पैदा हो उसके लिए कोई उपाय क्यों नहीं खोजा जा सकता।

इंसानों को छोड़कर सभी जीवो गाय भैंस बकरी कुत्ता बिल्ली सभी जानवरों केप्रसव प्राकृतिक रूप प्राकृतिक अंगों से से हो रहे हैं तो इंसानी महिलाओं के पेट क्यों फाड़े जा रहे हैं। जिस महिला का पेट दो या तीन बार फाड़ दिया जाएगा वह महिला अपनी वृद्धावस्था में अपने शरीर को कैसे स्वस्थ रख पाएगी। यह डॉक्टर लोग नर्सिंग होम वाले अपने बच्चों तक के लिए व्यवसाय तैयार करके जा रहे हैं महिलाओं को स्थाई रूप से मरीज बनाकर। यह शल्य प्रसव एक प्रकार से अघोषित परिवार नियोजन करने की मनसा भी नजर आती है। क्योंकि पेट फाड़कर बच्चे दो या तीन से अधिक कोई महिला करेगी ही नहीं तो देश में परिवार नियोजन स्वतह ही हो जाएगा।                                        

यह सब देख कर मंदिर के सेवक जगबीर दास और भक्त गणों ने संबंधितों को प्राकृतिक प्रसव सुनिश्चित कराने के लिए सबसे पहले 21 जनवरी को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। उसके पश्चात 27 जनवरी को मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी ग्वालियर को ग्वालियर जिले में 4 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। जिसमें मांग की के सभी प्रसव कराने वाले नर्सिंग होम अपने मुख्य द्वार पर एक साइन बोर्ड लगाएं यह चार बिंदु नंबर 1 यहां पर प्रसव कराया जाता है। नंबर दो गर्भाशय विशेषज्ञ के डॉक्टर का नाम उनकी डिग्री सहित। नंबर तीन सामान्य एवं सीजर प्रसव का कितना चार्ज निर्धारित किया गया है। नंबर 4 सन 2020 में उनके यहां सामान्य एवं सीजर प्रसव का कितना प्रतिशत रहा है।       
                                
 इसके पश्चात मंदिर के सेवकों द्वारा 21 फरवरी 2021 को फुलबाग गेट पर धरना दिया गया और उसी दिन केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को ज्ञापन दिया गया।
          
उसके पश्चात शहर के सांसद माननीय विवेक शेजवलकर, विधायक प्रवीण पाठक, विधायक सतीश सिकरवार को ज्ञापन दिया गया कि वह अपने स्तर पर संसद और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएं साथ ही माननीय ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने चूंकि भक्तगण श्रीराम के नारे लगा रहे थे इसलिए उन्होंने ज्ञापन स्वीकार नहीं किया। यह ज्ञापन 7 मार्च 2021 को दिए गए।           
                                    
 उसके पश्चात मौजूदा लोकसभा के सभी 537 सांसदों (6 लोकसभा शीट खाली है) को कमिश्नर के द्वारा 24 मार्च 2021 को ज्ञापन दिया गया। किसी के भी द्वारा कोई भी सार्थक कार्यवाही नहीं की गई। तब जगबीर दास सहित मंदिर के भक्त जनों ने यह निर्णय लिया  कि भारत के संसद में इस मुद्दे को पहुंचाने के लिए क्यों ना जिन सांसदों को ज्ञापन सौंपा हैं। उनके प्रतिदिन एक सांसद का पुतला जलाया जाए इसमें लगभग 540 दिन लगेंगे तब तक किसी ना किसी पार्टी का कोई ना कोई सांसद इस सार्थक मुद्दे को उठाने को तैयार हो जाएगा और हम देश कीमहिला शक्ति को कमजोर होने से बचाने मैं सफल होने की कल्पना कर सकते हैं। अतः शनिवार 19 जून से प्रतिदिन एक सांसद का पुतला भक्तों द्वारा मंदिर के गेट पर जलाया जाएगा।

Source : Agency