भोपाल
राज्य सरकार ने अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज और आक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन में जिस तरह से लूट की है और इससे सरकार की किरकिरी हुई है। उसके बाद अब निजी अस्पतालों पर सरकार की सख्ती तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसी कड़ी में आदेश जारी कर कलेक्टरों से कहा है कि उन्हें मरीजों के उपचार की अपडेट रिपोर्ट चाहिए। इस रिपोर्ट की जानकारी के लिए जिला स्तर पर अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी काम करेगी जो आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज, आक्सीजन, इंजेक्शन और अन्य सभी तरह के मामलों की रिपोर्ट देगी।

स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोरोना की दूसरी लहर अभी प्रदेश में बरकरार है। कोरोना कर्फ्यू लागू होने के बाद भी इसके एक्टिव केस कम नहीं हो रहे हैं। कोरोना मरीजों का सही उपचार राज्य शासन निजी अस्पतालों के सहयोग से कर रहा है। इसलिए आयुष्मान कार्ड धारकों के उपचार के लिए पात्र हितग्राहियों के लिए बिस्तर के इंतजाम, इलाज की दरें और अस्पताल में उसका प्रदर्शन, अस्पताल में दवाओं और आक्सीजन की उपलब्धता और बिस्तरों की उपलब्धता की जानकारी सार्वजनिक करना आवश्यक घोषित किया गया है।

इन सब मापदंडों की पूर्ति अस्पताल कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं। इसकी जांच के लिए हर जिले में एक कमेटी काम करेगी। इस कमेटी के अध्यक्ष अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी होंगे, जबकि सदस्य के रूप में सीएमएचओ या प्रतिनिधि, जिले के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि, जिले के नर्सिंग होम एसोसिएशन के प्रतिनिधि, जिले के वरिष्ठतम खाद्य और औषधि निरीक्षक होंगे। कलेक्टरों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे कमेटी का गठन कर उसकी पहली बैठक कर लें और रिपोर्ट तैयार कराने का काम करें।

आदेश में कहा गया है कि समिति सप्ताह में कम से कम दो बार इस बात की जांच कर कलेक्टर को रिपोर्ट देगी कि अस्पतालों में आक्सीजन का वितरण कैसा है? अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन तथा दवाओं के वितरण की स्थिति कैसी है? अस्पतालों में आयुष्मान योजना के हितग्राहियों के इलाज की समीक्षा रिपोर्ट देने के साथ समिति यह बताएगी कि उपचार के लिए तय दरों के आधार पर ही ट्रीटमेंट किया जा रहा है या अतिरिक्त राशि ली जा रही है।

Source : Agency