भोपाल

 देशी और अंग्रेजी शराब दुकानों के ठेकेदारों पर सरकार की मेहरबानी बरसने लगी है। 60 घंटे के प्रदेश व्यापी लॉकडाउन में जहां एक ओर शहरी क्षेत्रों में शराब की दुकानें बंद है ,वहीं  ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें  निर्बाध गति से संचालित हो रही है। मुरैना सहित कुछ जिले तो ऐसे हैं जहां कलेक्टर ने लॉकडाउन के दौरान भी शराब दुकानों को संचालित करने की छूट दे दी है। दमोह  में उपचुनाव के कारण लॉक डाउन की छूट के दौरान वहां भी शराब दुकानें खुली हुई है। इस बीच आबकारी आयुक्त ने आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि लॉकडाउन के दौरान बंद शराब दुकानों को वार्षिक लाइसेंस फीस में उतने दिन की छूट दी जाएगी जितने दिन दुकाने बंद रखी जाती है। 

एक ओर  राज्य सरकार शराब ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन के कारण ठप अन्य व्यवसाय के व्यापारी लगातार आर्थिक हानि झेल रहे हैं  । उन्हें वाणिज्य कर से लेकर जीएसटी और इनकम टैक्स में भी छूट प्रदान नहीं की जा रही है। कुछ दुकानें और होटल व्यवसाय तो ऐसे हैं जो रात में ही संचालित होती है, किंतु लगातार नाइट कर्फ्यू के कारण उनके व्यापार ठप पड़े हुए हैं  । कर्मचारियों तक को लीव विदाउट पेमेंट कर घर बैठा दिया गया है। इसी तरह लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू के दौरान रेट एवं अन्य खनिज के परिवहन पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। सरकार के इस दोहरे मापदंड के कारण रोजमर्रा के कई व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ ही रोज कमाने खाने  वालों के साथ ही पीड़ित लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

कई तरह से पहुंचाया जा रहा है लाभ

 एक तरफ जहां सरकार नशाबंदी की ओर लगातार कदम आगे बढ़ाने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर देशी और विदेशी शराब ठेकेदारों को अलग-अलग रास्ते से लाभ पहुंचाया जा रहा है। जिन ठेकेदारों के लाइसेंस फीस की अवधि 31 मार्च तक थी ,उन्हें आगामी 2 माह के लिए 31 मई तक लाइसेंस फीस में मात्र 10% वृद्धि कर ठेके दे दिए गए हैं। कुछ ठेकेदारों को दो तीन बार टेंडर बुलाकर लाइसेंस फीस में 10 से 30% तक कमी कर इस अवधि के लिए ठेके दिए गए हैं। जबकि वर्तमान में लागू आबकारी नीति के अनुसार कम से कम 20% लाइसेंस फीस में वृद्धि के बाद ही लाइसेंस नवीकरण किया जाना सुनिश्चित हुआ है। शिवराज सरकार के शासनकाल में इसी नीति से लाइसेंस दिया जाता रहा है। कमलनाथ सरकार के दौरान 20 से 35% तक लाइसेंस फीस बढ़ाकर नए वित्तीय वर्ष के लिए ठेके दिए गए थे।

नहीं बनी नई आबकारी नीति

आगामी 1 जून से प्रदेश भर में आबकारी के नए ठेके दिए जाना है। इसकी अवधि चालू वित्तीय वर्ष के शेष बचे 10 माह के लिए होगी या 1 जून 21 से 31 मई 22 तक होगी ,  यह भी अभी तक तय नहीं किया गया है। नई आबकारी नीति बनाने की बात कई बार सामने आई है किंतु अभी भी इसे मूर्त रूप नहीं दिया गया है। बताया जाता है कि इसमें सबसे बड़ी बाधा पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के द्वारा शुरू किया गया शराबबंदी आंदोलन है। जिससे सरकार डरी  हुई है और सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे की नई आबकारी नीति पर गंभीरता से विचार हो रहा है। मौजूदा स्थिति में चार -पांच दुकानों के छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर शराब के ठेके दिए जा रहे थे ,किंतु इसे बदल कर अब पूरे जिले या सबडिवीजन को एक इकाई मानकर शराब के ठेके दिए जाने की नीति पर भी विचार हो रहा है। इस दिशा में आबकारी अधिकारियों का मानना है कि अवैध शराब के विक्रय पर अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन इससे सरकार को राजस्व का लाभ तो नहीं होगा किंतु शराब प्रेमियों की जेब ज्यादा खाली होगी और शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचेगा। इन तथ्यों का अंतिम आकलन तभी हो सकता है जब सरकार की नई आबकारी नीति सामने आए और लागू हो।

Source : Agency