21 दिसंबर 2020 साल का सबसे छोटा दिन और लंबी रात रहने वाली है. इस खगोलीय घटना को Winter solstice कहा जाता है. सूर्य इस दिन कर्क रेखा से मकर रेखा की तरफ उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर प्रवेश करता है. ये वो समय होता है जब सूर्य की किरणें बहुत कम समय के लिए पृथ्वी पर रहती हैं. सूर्य की मौजूदगी करीब 8 घंटे रहती और इसके अस्त होने के बाद लगभग 16 घंटे की रात रहती है. बढ़ जाएगी ठंड- Winter solstice के बाद ठंड काफी ज्यादा बढ़ जाती है. इस घटना के बाद पृथ्वी पर चंद्रमा की रोशनी ज्यादा देर तक रहने लगती है. जबकि सूर्य बहुत कम समय तक अपनी रोशनी पृथ्वी पर बिखेर पाता है. सूर्योदय और सूर्यास्त का सही समय टाइम जोन और भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है.
 
विंटर सॉल्सटिस का वैज्ञानिक कारण- Winter solstice इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी अपने घूर्णन के अक्ष पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई होती है और झुकाव के कारण प्रत्येक गोलार्ध को सालभर अलग-अलग मात्रा में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है. बता दें कि दिसंबर विंटर सॉल्सटिस के दिन जब सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के दक्षिण की ओर मकर रेखा के साथ पहुंचती हैं तो उत्तरी गोलार्ध में यह दिसंबर संक्रांति और दक्षिणी गोलार्ध में इसे जून संक्रांति के रूप में जाना जाता है. समर सोल्सटिस- Winter solstice के विपरीत 20 से 23 जून के बीच Summer solstice भी मनाया जाता है. यह साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है. वहीं 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन और रात का समय बराबर होता है.

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