सीवान  
सीवान जहरीली कांड के तार कोलकाता से जुड़े हैं।  सेनेटाइजर बनाने के लिए इथेनॉल मंगवाकर शराब बनाई गई। इसमें मुजफ्फरपुर के शराब माफिया की संलिप्तता उजागर हुई है। अब पुलिस सीवान से पश्चिम बंगाल तक जांच में जुट गई है। शराब माफिया की इस नई तरकीब से पुलिस भी हैरान है। इससे पहले होमियोपैथी दवा के नाम पर लिए गए अल्कोहल से शराब बनाने की बात सामने आई थी। 

एडीजी (मुख्यालय) जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि सीवान के लकड़ी नवीगंज प्रखंड के बाला गांव में चार लोगों की मौत जहरीले पेय पदार्थ से हुई है। इस मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब तक हुई जांच में यह बात सामने आयी कि सेनेटाइजर बनाने के नाम पर मंगवाए गए इथेनॉल से जहरीला पेय पदार्थ बनाया गया था। पुलिस इसे शराब बताने से बच रही है जबकि शराब माफिया कोरोना माहामारी की आड़ में अपना धंधा चमका रहे हैं।

पुलिस मुख्यालय के सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि इथेनॉल मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा निवासी मो. निशाद ने कोलकाता से मंगवाया था। उसने इसे मामले के मुख्य आरोपी सीवान जिले के ही दरौंधा थाना के बेलदारी टोला निवासी संदीप चौहान और दीपक चौहान को दिया था। ये दोनों भाई पहले से कई मामलों में आरोपी हैं। इन्होंने इथेनॉल को बाला गांव निवासी मंटू बिंद और सुरेंद्र बिंद को दिया। ये दोनों भी अवैध शराब मामले में आरोपित हैं। इन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर जहरीला पेयपदार्थ बनाया और इसकी सप्लाई की। 

पुलिस ने मुख्य अभियुक्त संदीप और दीपक के घर छापेमारी की तो 50 लीटर स्प्रिट और एक बोरा फिटकरी बरामद हुई। इस मामले में अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी को छापेमारी की जा रही है। एक टीम को कोलकाता भी भेजा गया है, ताकि इससे जुड़े लिंक की तहकीकात की जा सके। मुजफ्फरपुर से सीवान तक इथेनॉल को ट्रांसपोर्ट करके लाने वाले इसी जिले के आदर्श नगर निवासी दिनेश तिवारी और नीरज दुबे को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। 

एडीजी ने कहा कि कुछ दिन पहले सारण में हुए जहरीली शराबकांड का कनेक्शन यूपी के मिर्जापुर से था। इस बार कोलकाता से कनेक्शन जुड़ रहा है। बताया कि 2022 में शराबबंदी कानून के उल्लंघन में 1लाख 31 हजार 398 लोगों को सजा हुई थी। 1480 को दो साल से अधिक की सजा मिली है। जिन जिलों में सबसे ज्यादा सजा दिलायी गयी है, उनमें पटना में 701, बक्सर में 282 को सजा हुई।
 

Source : Agency