भोपाल 

भोपाल में इन दिनों कथा कह रहे जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंच से ही भोपाल का नाम बदलने की मांग कर दी है। उन्होंने कहा कि भोपाल नाम मूल नाम नहीं है इसलिए इस शहर का नाम 'भोजपाल' रखा जाना चाहिए। मध्यप्रदेश के राजा भोज के नाम पर इस शहर का नाम बदला जाए। रामभद्राचार्य ने नाम बदलने  को लेकर वार्निंग भी दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया और भोजपाल नाम नहीं किया गया तो वो दोबारा भोपाल नहीं आएंगे। नाम बदलने के बाद ही वो अब भोपाल में फिर से कथा करेंगे।

रामभद्राचार्य कि 9 दिन की कथा 31 तारिख तक चलेगी। उन्होंने कहा कि भोपाल का पुराना नाम भोजपाल ही था लेकिन पुराने शासकों ने 'ज' हटाकर भोपाल कर दिया था। होशंगाबाद का तर्क देते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जब होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम हो सकता है तो भोपाल का क्यों नहीं, इसमें क्या दिक्कत है। उत्तरप्रदेश के फैजाबाद और इलाहबाद का उदहारण देने से भी महराज पीछे नहीं रहे। 

कथा की शुरुआत के पहले ही दिन से विवादित मांग के चलते जगद्गुरु रामभद्राचार्य लाइम लाइट में आ गए हैं। सोमवार को कलश यात्रा और भगवा ध्वज लगी बाइकों की रैली के बाद महराज सुर्खियों में बने हुए हैं। रामभद्राचार्य की घोषणा के बाद नाम बदलने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। सोमवार शाम को पहले दिन की कथा में हजारों लोगों की भीड़ पहुंची। 

मध्य प्रदेश में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव है। ऐसे में नाम बदलने के मुद्दा एक बार फिर सियासी गुणागणित और समीकरण साधने का जरिया बन सकता है। हिन्दू वोटरों और साधू संतों को लुभाने के लिए प्रदेश में शासित भाजपा सरकार नाम बदलने के बारे में विचार कर सकती है। सूबे में इससे पहले कई बार ऐसी मांगें उठ चुकी है और होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया गया है। 
 

Source : Agency