जीवन के इस कालचक्र में हार जीत लगी रहती है, पर फिर भी कोई भी हार का मुख नही देखना चाहता. विजय एक ऐसा वर है जिसका हर कोई वरण करना चाहता है, फिर चाहे वो किसी भी क्षेत्र में हो. कोई पढ़ाई ने जीत की अपेक्षा रखता है तो कोई खेलों में. कोई चुनाव में तो कोई युद्ध में. इस मृत्युलोक में माया के मोह पाश से बंधे सभी प्राणी विजय के अभिलाषी होते हैं. आज श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज से जानेंगे एक ऐसे विशेष परम पवित्र मंत्र के बारे में, जिसके जाप से आपको निश्चित ही विजय प्राप्त होगी और आपके शत्रु हार का मुख देखेंगे. जानिए कौन सा मंत्र है इतना चमत्कारी कि आपकी हारती बाजी को जीती हुई बाजी में बदल दे.

कौन सा है इतना चमत्कारी मंत्र?
आप अपने जीवन में विजय के निश्चित अभिलाषी हैं, तो एक अत्यंत पावन, पवित्र और दुर्लभ मंत्र से विजय सुगम हो जाती है. अपराजिता स्तोत्र माता अपराजिता को प्रसन्न करने का एक ऐसा अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी मंत्र है, जिसके जाप से माता की कृपादृष्टि प्राप्त होती है और माता के आशीष और अनुकंपा से विजय भी मिलती है. सनातन धर्म की मान्यताओ के अनुसार माता अपराजिता की पूजा आराधना से किसी भी व्यक्ति को सभी दिशाओं में विजय प्राप्ति का वरदान मिलता है. पुराणों में वर्णन अनुसार भगवान राम ने भी लंका पर विजय से पहले माता के ही इस मंत्र से माता की उपासना की थी, जिसके फल स्वरूप वे युद्ध में विजयी हुए.

क्या है पूजन विधि?
माता अपराजिता अत्यंत शक्तिशाली देवी हैं, जिनके नाम से ही यह स्पष्ट होता है कि शक्ति की वह देवी, जिसे कोई पराजित ही नहीं कर सकता. माता के ऐसे स्वरूप के पूजन के लिए स्वच्छ मन, तन एवं हृदय से माता का स्मरण कर इस परम शक्तिशाली अपराजिता स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इसके नियमित पाठ से माता प्रसन्न होती हैं और अभीष्ट वरदान देती हैं.

Source : Agency