कोलकाता
भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। अब पूरी पलटन चुनावी जंग में उतरने वाली है। नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे महारथी 120 रैलियां करेंगे। भाजपा की उम्मीदें नरेन्द्र मोदी पर टिकी हैं इसलिए उनकी अधिक से अधिक सभाएं होंगी। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने 20 रैलियों के लिए सहमति दे दी है। अमित शाह और जेपी नड्डा की पचास-पचास रैलियों की रूपरेखा बनायी गयी है। फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ से भी भाजपा ने बहुत आस लगा रखी है। अन्य वरिष्ठ नेताओं की करीब 500 चुनावी रैलियों की योजना है। ममता बनर्जी जैसी मजबूत जनाधार वाली नेता से मुकाबले में भाजपा कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहती। 

नरेन्द्र मोदी की रणनीति चुनाव की घोषणा से पहले ही नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनावी समां बांध रखा है। नरेन्द्र मोदी अपनी लोकप्रियता भुनाने के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों पर भी ध्यान रख रहे हैं। वे 26 मार्च को बांग्लादेश की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस यात्रा के दौरान वे मतुआ सम्प्रदाय के संस्थापक हरिचंद्र ठाकुर की जन्मस्थली का भी दर्शन करेंगे। बंगाल में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 1 करोड़ 84 लाख है। इनमें आधे लोग मतुआ सम्प्रदाय से जुड़े हैं। मतुआ सम्प्रदाय का मसला पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में बहुत अहम है। मतुआ सम्प्रदाय एक धार्मिक पंथ है जिसकी शुरुआत समाजसुधारक हरिचंद्र ठाकुर ने 1860 में की थी। मतुआ लोग हरिचंद्र ठाकुर को भगवान का अवतार मानते हैं। उनका जन्म संयुक्त बंगाल (बांग्लादेश) के ओरकांडी में हुआ था। 

जब 1947 में भारत का विभाजन हुआ तो मतुआ सम्प्रदाय के लोगों की अधिसंख्य आबादी पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में पड़ गयी। विभाजन के बाद हरिचंद्र ठाकुर के परिजन पश्चिम बंगाल में आ गये। उनके साथ मतुआ लोगों की एक बड़ी आबादी भी पश्चिम बंगाल में आ गयी। ऐसे में मतुआ लोगों की नागरिकता का एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ। अब यह सवाल पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। मतुआ वोट बैंक पर नजर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मतुआ पंथ के संस्थापक हरिचंद्र ठाकुर के वंशज (मतुआ माता के पोते) शांतनु ठाकुर को वनगांव से टिकट दिया था जहां से वे विजयी रहे थे। अनुसूचित जाति की एक बड़ी आबादी मतुआ सम्प्रदाय से जुड़ी है। इसलिए नरेन्द्र मोदी ने विधानसभा चुनाव में इस समुदाय का जनसमर्थन हासिल करने के लिए ये विशेष योजना बनायी है। 

बंगाल में करीब 40 विधानसभा सीटों पर मतुआ वोटरों की संख्या निर्णायक है। वे जिसकी तरफ झुकेंगे उसका पलड़ा भारी होगा। 2010 में मतुआ माता वीणापाणि देवी ने ममता बनर्जी को समुदाय का संरक्षक घोषित कर दिया था। इसका नतीजा ये रहा कि 2011 में उन्होंने वामपंथियों की 34 साल पुरानी सरकार उखाड़ फेंकी। अब नरेन्द्र मोदी इनको अपने पाले में करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
 

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