रायपुर। प्रदेश में भाजपा का आज पहला बड़ा प्रदर्शन था राज्य सरकार के खिलाफ धान खरीदी की अव्यवस्था को लेकर जिसकी अगुवाई करने वाली थीं राज्य भाजपा प्रभारी डी. पुरेदंश्वरी, लेकिन आज वे नहीं पहुंची और क्या था कांग्रेस को मौका मिल गया जब प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने तंज कसा कि जब पूरे प्रदेश में माकूल व्यवस्था के साथ धान खरीदी चल रही है बल्कि 20 साल की धान खरीदी का रिकार्ड भी टूट गया। किसान पूरी तरह से संतुष्ट हैं यदि कोई असंतुष्ट हैं तो चंद भाजपा  नेता जिनकी वास्तविकता शायद प्रभारी महोदया को पता चल गया और आज वे रायपुर नहीं पहुंची। मतलब उन्हे भी समझ आ गया कि सही चीज का विरोध कैसे करें? समझने की बारी अब प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं की हैं।
त्रिवेदी ने कहा है कि भाजपा नेता दूबर पर दो आषाढ़ की स्थिति में आ गया है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों किसान विरोधी काले कानूनों के कारण पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी किसानों में भाजपा की केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा उमड़ रहा है। छत्तीसगढ़ में किसानों को सही दाम सही खरीद सही व्यवस्था मुहैया कराने वाले कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन से भाजपा से किसान और नाराज हुए है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की स्थिति लगातार खराब हो रही है। उनको भाजपा के कुछ नेताओं ने जानकारी दी है। पुरंदेश्वरी को जब पता चला कि छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार की सरकारी धान खरीद में अपना धान बेच दिया है और मोदी के किसान विरोधी कानूनों को नकारा है तो पुरंदेश्वरी इससे भी सख्त नाराज हुई।

त्रिवेदी ने कहा है कि आज के धान खरीदी पर भाजपा के आंदोलन में वही नेता भाग ले रहे है जिन्होने अपना धान छत्तीसगढ़ सरकार के धान खरीदी केन्द्रों में बेचा है। यह भाजपा का दोहरा चरित्र है। दरअसल भाजपा किसान विरोधी राजनीति कर रही है। किसानों की सरकार के खिलाफ किसान विरोधी भाजपा का आंदोलन है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने लगातार तीसरे साल धान खरीदी का रिकार्ड तोड़ा है। ज्यादा किसानों का धान खरीदा है, ज्यादा रकबे का धान खरीदा है, ज्यादा धान खरीदा है। 80 लाख टन, 83 लाख टन और इस साल अभी तक 84 लाख टन जबकि अभी खरीदी का समय बाकी है। जितना धान रमन सिंह जी 5 साल के कार्यकाल में खरीदते थे तीन साल के कार्यकाल में ही उतना धान खरीदकर कांग्रेस सरकार ने किसान समर्थक रवैया स्पष्ट कर दिया। भाजपा को केन्द्र में भी और छत्तीसगढ़ में भी अपनी किसान विरोधी सोच को बदलने की जरूरत है।

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