नई दिल्ली
कृषि कानूनों को लेकर करीब 2 महीने से किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने डेरा जमाया हुआ है। खुदरा व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है किसान आंदोलन से अब तक व्यापारियों को 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। संगठन ने किसानों के साथ बातचीत में व्यापारियों को भी शामिल करने की मांग की है।

कैट ने कहा है कि प्रस्तावित संयुक्त समिति में व्यापारियों को भी रखा जाए, क्योंकि नए कृषि कानूनों से व्यापारियों के हित भी जुड़े हैं। कृषि कानूनों को डेढ़ साल टालने के सरकार के नए प्रस्ताव को कैट ने न्यायसंगत बताया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, 'सरकार का हालिया प्रस्ताव न्यायसंगत है और मुद्दे को हल करने के लिए सरकार की इच्छा को दर्शाता है। इसलिए अब किसानों को कृषि समुदाय के बड़े हित और कृषि व्यापार में लगे लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए और अपना आंदोलन वापिस ले लेना चाहिए।'

Source : Agency