इस्लामाबाद 
लगातार फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की ग्रे लिस्ट में रहने के बावजूद पाकिस्तान सुधर नहीं रहा है। वह अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों से इतना बेखौफ है कि देश में आतंकवादी संगठनों और उनकी आर्थिक फंडिंग जारी है। हालांकि, एक बार फिर पाकिस्तान पर अब FATF की ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा मंडरा रहा है। अगर ऐसा होता है तो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान एक-एक पाई के लिए मोहताज हो जाएगा।ग्रीक सिटी ने इसकी जानकारी दी है। 

खबर के मुताबिक, पाकिस्तान में अभी भी जमात-उद-दावा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठन पूरी बिना किसी डर के चल रहे हैं। FATF का गठन साल 1989 में हुआ था। कई देश इसके सदस्य हैं। अंतराराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाए रखना इस संस्था का मकसद है। यह अपने सदस्य देशों को टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्र‍िंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकता है। अगले महीने FATF के सदस्य देशों की बैठक है और उस समय पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट स्टेटस पर विचार किया जा सकता है। बता दें कि पाकिस्तान साल 2018 से ही ग्रे लिस्ट में है यानी उसपर नजर रखी जा रही है।

 FATF के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर ने बीते साल अक्टूबर में हुई रिव्यू मीटिंग के दौरान यह कहा था कि आतंकवाद से निपटने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों में गंभीर कमियां देखी गई हैं। उन्होंने पाकिस्तान को इन कमियों को दूर करने के लिए कुछ समय दिया था और कहा कि पाकिस्तान के सुधरने के लिए हमेशा इंतजार नहीं किया जा सकता है। प्लेयर ने कहा था, 'जहां तक हम देख रहे हैं कि आतंक के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई में तेजी जरूर आई है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हम पाकिस्तान को थोड़ा समय देंगे लेकिन हम हमेशा ऐसा नहीं करेंगे।' फिलहाल ग्रे लिस्ट में मौजूद पाकिस्तान अगर आतंकवाद पर नियंत्रण के अपने प्रतिबद्धता को लेकर जरूरी कार्रवाई नहीं करता तो FATF की टीम इस्लामाबाद जाकर निरीक्षण कर सकती है और उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है।

Source : Agency