पटना 
मंगलवार को पंचांग के अनुसार अगहन या मार्गशीर्ष महीना शुरू हो रहा है। सनातन धर्मावलंबी इस महीने रविवार का व्रत आरंभ कर भगवान सूर्य की उपासना करते हैं लेकिन इस बार अगहन महीने में शुक्ल पक्ष के रविवार को पंचक और खरमास होने से असुविधा हुई है। 

इस बार व्रतियों ने कार्तिक महीने में ही रविवार का व्रत आरंभ किया और भगवान सूर्य नारायण की पूजा अर्चना की। आचार्य शशिकांत पाठक बताते हैं कि सनातन धर्म में पांच नक्षत्रों के विशेष संयोग को पंचक कहा जाता है। इन पांच नक्षत्रों में घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती हैं। पंचक का स्वामी ग्रह कुंभ और राशि मीन होती है। प्रत्येक माह आने वाले पंचक में इन पांच नक्षत्रों की भी गणना की जाती है।

नक्षत्रों के मेल से बनने से वाले विशेष योग को पंचक कहते हैं। जब चंद्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है तो उस समय को पंचक कहा जाता है। ज्योतिषशास्त्र में पंचक को शुभ नहीं माना जाता है। इस बार अगहन के शुक्ल पक्ष का रविवार 20 दिसंबर पड़ रहा है जबकि पंचक का प्रारंभ 19 को ही दिन के 10 बजकर 20 मिनट से हो रहा है जो 23 दिसंबर की   रात तक रहेगा। इसके बाद शुक्ल पक्ष  का दूसरा रविवार 27 दिसंबर को  है जो कि खरमास के मध्य में है। रविवार का व्रत आरंभ करने वालों के लिए योग वर्जित है।

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