नरसिंहगढ़
वन्य प्राणियो को वर्ष भर पेयजल उपलब्ध कराने वाला सूर्यवंशी तालाब इन दिनों वन विभाग के भृष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। प्रतिबंध होने के बावजूद इस तालाब से खेतो के लिए बड़े पैमाने पर पानी को बेचा जा रहा है। जिसके कारण गर्मी के पूर्व ही तालाब ने दम तोड़ दिया है। जबकि इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जलस्तर भी बढ़ा हुआ था। लेकिन अधिकारियो की मिलीभगत से सीधे खेतो में छोड़े गए पानी से तालाब सूखने के कगार पर है। फि लहाल तालाब में मोटर, पाईप डले हुए है जिनकी जानकारी होने के बावजूद वन अमले द्वारा कार्रवाई नही होना सीधे-सीधे सॉठ-गॉठ को उजागर कर रहा है। जानकारी के अनुसार हर साल इसी तरह का मामला सामने आता है लेकिन विभाग की चुप्पी  मामले में कई सवाल खड़े करती है।

एक तरफ  जहां वन विभाग स्वयं के तालाब का पानी खेतो में छोड़ रहा है। वही दूसरी तरफ  गर्मी के दिनो में खरीदे गए पानी से अभयारण्य और आसपास क्षेत्रो में जलापूर्ति की जाती है। लाखो रूपए वन क्षेत्र में पानी की पूर्ति पर खर्च किए जाते है। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार वन विभाग अपने ही जल संसाधनो की सुरक्षित क्यो नही कर पा रहा है। लंबे समय से वन विभाग में यह खेल चल रहा है जिसक ी उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदारो पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाना चाहिए। इसी सूर्यवंशी तालाब में ग्रामीण सिंगाड़े की खेती भी करते नजर आते है जबकि वन क्षेत्र के इस तालाब का उपयोग केवल वन्य प्राणियो के जलस्त्रोत के रूप में किया जाने का नियम है।

पिछले कई वर्षों से कोटरा के सूर्यवंशी तालाब का पानी खेतों में दिए जाने का मामला सामने आता है। हर साल वन अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचती है तो वह मामले में कार्यवाही की बात कहते हैं लेकिन बड़ी बात यह है कि सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद वन विभाग अधिकारी मामले में कोई कार्यवाही नहीं करते हैं जिस कारण पूरा मामला संदेह के घेरे में नजर आता है। इसके अलावा वन क्षेत्रों में अवैध कटाई से लेकर खनन के भी मामले सामने आए हैं लेकिन इन मामलों में भी आज तक कोई बड़ी कार्यवाही देखने को नहीं मिली है।

Source : Agency