पटना

कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद से अब तक बिहार में 72,256 सैंपल की जांच हो चुकी है. देश के अन्य राज्यों की तुलना में देखें तो बिहार में टेस्टिंग की रफ्तार काफी धीमी है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार अपने अधिकारियों को इस बात का निर्देश जारी कर रहे हैं कि रोजाना प्रदेश में कम से कम 10,000 सैंपल की जांच होनी चाहिए. इसके बावजूद रोजाना औसतन 2,000 सैंपल की जांच हो पा रही है.

बिहार में टेस्टिंग की रफ्तार को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों 22 TrueNat मशीन भेजी है. आमतौर पर यह मशीन टीबी की जांच करने के लिए सक्षम है आईसीएमआर से अनुमोदन मिलने के बाद इन मशीनों को अभी बिहार भेजा गया है, ताकि टेस्टिंग ज्यादा से ज्यादा हो सके.

बिहार के कई जिलों में अब इन मशीनों का इस्तेमाल शुरू हो चुका है. बिहार के बड़े शहरों में टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है, मगर जिलों में भी इसकी रफ्तार को बढ़ाने के लिए कदम उठाया गया है.

केंद्र से मिलीं TrueNat  मशीनें

केंद्र से मिलीं TrueNat मशीनों को नालंदा के वर्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बेतिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के साथ-साथ रोहतास, मुंगेर, बक्सर, सिवान, मोतिहारी, पूर्णिया, कटिहार और मधुबनी जिले के सरकारी अस्पतालों में भी लगाया गया है.

TrueNat मशीन किस तरीके से काम करती है इसका भी जायजा 'आजतक' ने मोतिहारी और मुंगेर जिले में जाकर लिया. स्थानीय डॉक्टरों ने बताया कि इस मशीन के लग जाने के बाद कोविड-19 सैंपल की जांच में कुछ तेजी जरूर आई है.

अगले दो दिन में पहुंच जाएंगी मशीनें

केंद्र सरकार की तरफ से बिहार को जल्द Cobas 6800 मशीन भी उपलब्ध करवाई जाएगी, ताकि पटना में आरएमआरआई, जो बिहार में टेस्टिंग का केंद्र बिंदु है वहां पर इस मशीन का इस्तेमाल कर टेस्टिंग की रफ्तार को और तेज किया जाए. बताया जा रहा है कि यह मशीन बेंगलुरु से बिहार अगले दो दिनों में पहुंच जाएगी.

आरएमआरआई में फिलहाल तकरीबन 800 से 1000 सैंपल की जांच रोजाना होती है, मगर Cobas 6800 के लग जाने के बाद टेस्टिंग की संख्या दोगुनी हो जाएगी.

2000 टेस्ट होंगे रोजाना

आरएमआरआई के निदेशक प्रदीप दास ने कहा, केंद्र सरकार की तरफ से कोविड-19 की जांच करने के लिए पूरे उत्तर भारत में केवल आरएमआरआई को Cobas 6800 हासिल हुई है. यह मशीन पूरी तरीके से ऑटोमेटिक है. अभी हमारे संस्थान में 800 से 1000 तक रोजाना टेस्टिंग होती है, मगर इस मशीन के कार्यरत हो जाने के बाद से तकरीबन 2000 टेस्ट रोजाना होंगे.

जिलों में टेस्टिंग को और तेज करने के लिए आईसीएमआर ने अब प्राइवेट लैब्स को भी कोविड-19 सैंपल की जांच करने के लिए अनुमति दे दी है. बिहार में पहले से ही पटना और मुजफ्फरपुर में स्थित डॉ लाल पैथ लैब और पाथ काइंड डायग्नोस्टिक लिमिटेड को कोविड-19 सैंपल की जांच की अनुमति दी है. अब पटना में सेन डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड को भी कोविड-19 की जांच करने के लिए अनुमति मिल गई है.

Source : Agency