ग्वालियर
शहर में मंगलवार को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की जयंती मनायी गयी. गोडसे की 111वीं जयंती पर हिंदू महासभा के दफ्तर में 111 दीपक जलाए गए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ ने इस पर अफसोस जताया है. उन्होंने शिवराज सरकार से पूछा कि वो गांधी के साथ हैं या गोडसे के?

हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष जयवीर भारद्धाज का दावा है कि नाथूराम गोडसे की जयंती पर दौलतगंज स्थित महासभा के दफ्तर में नाथूराम गोडसे की तस्वीर के सामने 111 दीप जलाए गए. वहीं, ग्वालियर शहर में हिंदू महासभा के तीन हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने घर घर दीपक जलकर गोडसे को याद किया. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या को लेकर हिंदू महासभा का तर्क है कि नाथूराम गोडसे देशभक्त था.

कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी. पीसीसी चीफ और पूर्व सीएम कमलनाथ ने ट्वीट किया कि-शिवराज सरकार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की जयंती मनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है.हमारी सरकार ने ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की थी. बापू के हत्यारे का महिमामंडन क़तई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. शिवराज सरकार स्पष्ट करे कि वो बापू की सोच के साथ है या गोडसे की विचारधारा के साथ? हम मांग करते हैं कि इसके दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो. लॉकडाउन में इस तरह का आयोजन कैसे हुआ, इसकी भी जांच हो. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस इसका हर मंच पर पुरज़ोर विरोध करेगी.

वैसे ये पहली बार नहीं है जब ग्वालियर की आखिल भारतीय हिंदू महासभा ने नाथूराम गोडसे की पूजा पाठ की है. साल 2017 में हिंदू महासभा ने गोडसे की मंदिर बनाने का एलान किया था और दौलतगंज स्थित कार्यालय में नवंबर महीने में नाथूराम गोडसे की मूर्ति को स्थापति किया था. इसके विरोध में कांग्रेस ने काफी हंगामा किया था. करीब सप्ताह भर चले ड्रामे के बाद गोडसे की मूर्ति प्रशासन ने जब्त कर ली थी. वो मूर्ति अब कोतवाली थाने की हवालात में पड़ी है.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या की गई थी. गांधीजी की हत्या की तैयारी नाथूराम गोडसे ने ग्वालियर में ही की थी. स्वर्ण रेखा के किनारे गोडसे ने पिस्टल से गोली चलाने का अभ्यास किया था, उस दौरान तीन दिन तक गोडसे अपने साथी के साथ ग्वालियर में रुका था. दरअसल, ग्वालियर हिंदू महासभा का गढ़ था. यही वजह है कि गोडसे को यहां मदद मिली थी.

महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश को अंजाम देने के लिए नाथूराम गोडसे ने पूरी तैयारी ग्वालियर में की थी. इसमें गोडसे के साथ ग्वालियर के डॉ. दत्तात्रेय परचुरे, गंगाधर दंडवते, गंगाधर जाधव और सूर्यदेव शर्मा शामिल थे. डॉ. परचुरे ने हिंदू राष्ट्र सेना भी बनाई थी और वो हिंदू महासभा के साथ पूरी तरह सक्रिय रहते थे. डॉ. परचुरे के घर के पीछे वाली जगह पर गोडसे ने गोली चलाने की रिहर्सल की थी. जब सब कुछ उम्मीद के मुताबिक निकला तो गोडसे आप्टे के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गया.

30 जनवरी 1948 की शाम 5 बजे महात्मा गांधी प्रार्थना सभा के लिए निकले थे. फौजी कपड़ों में नाथूराम गोडसे अपने साथियों करकरे और आप्टे के साथ भीड़ में घुलमिल गया. गोडसे ने बापू के पैर छूते-छूते पिस्टल निकाल ली और महात्मा गांधी के शरीर में तीन गोलियां उतार दी थीं.

Source : Agency