नई दिल्ली 

इस्लाम धर्म में सबसे पवित्र महीना माना जाने वाला रमज़ान दस्तक देने वाला है. रमज़ान के महीने में मुसलमान व्रत यानी रोज़ा रखते हैं और शिद्दत से अल्लाह की इबादत करते हैं. इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक रमज़ान की शुरुआत चांद देखने के बाद होती है. इस साल भारत में रमज़ान का महीना 24 या 25 अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है. अगर 24 अप्रैल को रमज़ान का चांद दिखाई दिया तो 25 अप्रैल को पहला रोजा रखा जाएगा, नहीं तो 26 अप्रैल का पहला रोजा होगा.

मुसलमान रमज़ान के पूरे महीने यानी चांद की तारीख के अनुसार 29 या 30 दिन के रोज़े रखते हैं. रमज़ान का चांद दिखाई देने के बाद सुबह को सूरज निकलने से पहले सहरी खाकर रोज़ा रखा जाता है. जबकि सूर्य ढलने के बाद इफ्तार होता है. जो लोग रोज़ा रखते हैं वो सहरी और इफ्तार के बीच कुछ भी नहीं खा-पी सकते.

इस्लाम में रमज़ान के महीने को सबसे पाक यानी पवित्र महीना माना जाता है. ये इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना होता है. रमज़ान के महीने में अल्लाह की किताब 'कुरान शरीफ' नाज़िल यानी जमीन पर उतरी थी. इसलिए रमज़ान के महीने में मुसलमान ज्यादातर अपना वक्त नमाज और कुरान पढ़ने में गुजारते हैं.

रमज़ान में मस्जिदों में तरावीह यानी एक विशेष नमाज़ भी पढ़ी जाती है. हालांकि, इस बार कोरोना वायरस के चलते मस्जिदों में लोग एक साथ नमाज नहीं पढ़ सकेंगे. इस्लाम धर्म की मान्यता है कि रमज़ान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद हो जाते हैं. अल्लाह रोज़ेदार और इबादत करने वाले की दुआ कूबुल करता है. रमज़ान के पवित्र महीने में गुनाहों से बख्शीश मिलती है.


ऐसा माना जाता है कि रमज़ान का महीना इंसान को खुद पर काबू करना सिखाता है. रमज़ान में मुसलमान इबादत करके अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. कहा जाता है कि इस महीने में की गई इबादत का बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना अधिक सवाब यानी फल मिलता है.

Source : Agency