पटना 
बिहार में कोरोना संक्रमण के शिकार हुए मरीजों में विदेशों की तरह संक्रमण का प्रभाव नहीं है। यहां अबतक विदेश से लौटे कम उम्र के नौजवान ही इसके शिकार
हुए है। पिछले पांच दिनों में बिहार में तीन कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर अपने घर वापस लौटे। इनमें दो एनएमसीएचपटना  से और एक मरीज एम्स पटना से ठीक हुआ। वायरस का मल्टीपल स्वरूप यहां नहीं दिखा है। यहां के मरीज लगभग एक हफ्ते में ठीक हो जा रहे हैं। यहां कोरोना के अपेक्षाकृत माइल्ड वायरस का
प्रकोप हुआ है। 

कोरोना के इलाज के लिए विशेष अस्पताल के रूप में चिह्नित एनएमसीएच के कोरोना जांच के नोडल पदाधिकारी डॉ. अजय सिन्हा ने बताया कि स्पेन, इटली, जर्मनी, चीन सहित अन्य देशों से मीडिया के माध्यम से मिल रही जानकारी काफी भयावह और डरावनी है। जबकि हमारे यहां उस प्रकार के मरीज अबतक नहीं मिले हैं। विदेशों से लौटने वाले जो भी मरीज हैं वह युवा हैं। यह भी अबतक की जांच में स्पष्ट हो चुका है कि युवाओं में कोरोना का प्रभाव उतना नहीं है जितना अबतक बताया जा रहा था। 

दूसरी ओर, कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के क्रम में आईसीएमआर द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन से भी मरीजों को लाभ हुआ है। डॉ. सिन्हा ने बताया कि मरीजों को दो प्रकार की दवाएं दी जा रही है। इनमें एक हाइड्रोक्लोरोपिन और एजिथ्रोमाइसिन शामिल हैं। इनसे मरीजों के स्वास्थ्य में उतरोत्तर सुधार देखा गया है। कोरोना संक्रमितों के इलाज में जुटे डॉक्टरों की मानें तो अब तक बिहार में कोरोना के गंभीर मरीज सामने नहीं आए हैं। यह बिहार के लिए एक अच्छा संकेत है। कोरोना के इलाज में जुटे डॉक्टरों ने मरीजों के ठीक होने का श्रेय पूरी टीम को दिया है। 

Source : Agency