इंदौर
मध्‍य प्रदेश के इंदौर में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी मुस्‍तैदी से जुट गया है. कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि लोग कुछ दिन तक हरी सब्जियों के पीछे ना भागें क्योंकि ये कई हाथों से गुजर कर आप तक पहुंचती हैं, इसीलिए थोड़े दिन परेशानी उठा लें. साथ ही उन्‍होंने लोगों को सलाह दी है कि कुछ दिन तक दाल-चावल और आलू-प्याज खाकर काम चलाएं. इसके अलावा उन्‍होंने मीडिया कर्मियों से भी खास अपील की है. आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद पूरा देश 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है और अब इंदौर शहर को कलेक्‍टर के आदेश के बाद पूरी तरह से लॉकडाउन (Lockdown) कर दिया गया है.

कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों से भी अपील की जा रही है कि वो बहुत ज्यादा शहर में ना घूमें, जहां आवश्यकता हो केवल वहीं जाए. लोग सुरक्षित रहें यही हमारी कामना है. लोग घरों में आलू-प्याज रखें और हरी सब्जियों के लिए ज्यादा ना भटकें, क्योंकि हरी सब्जियों से भी वायरस आपके घरों तक आ सकता है. थोड़े समय की तकलीफ जरूर है लेकिन उसे अपने स्वास्थ्य के लिए संयम रखने की आवश्यकता है. केवल 14-15 दिनों का संयम रखने की आवश्यकता है.

संभागायुक्त आकश त्रिपाठी और आईजी विवेक शर्मा भी शहर का दौरा कर रहे हैं. वे कोरोना संक्रमित रानीपुरा भी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया.कोरोना वायरस से संक्रमित जो भी क्षेत्र इंदौर में हैं उसे प्रशासन ने पूरी तरह से टेकओवर कर लिया है. यहां आने और जाने की मंजूरी किसी को भी नहीं है. सारे सामानों के साथ दवाइयों का वितरण भी प्रशासन करेगा. जबकि कुछ अस्पताल भी चिन्हित किए जा रहे हैं, जहां मरीजों का उपचार चलेगा. यही नहीं, जिनमें कोरोना के लक्षण पाए जाएंगे उनका विशेष अस्पतालों में इलाज होगा.

लॉकडाउन के दौरान शहर की कई स्वंयसेवी संस्थाएं भोजन के पैकेट वितरित कर रही थी जिसके चलते भीड़ एकत्र हो जाती थी. इस व्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए कलेक्टर मनीष सिंह ने सख्त कदम उठाते हुए साफ कह दिया है कि अब शहर में कोई भी स्वयंसेवी संस्था भोजन नहीं बांटेगी. प्रशासन अलग से 10 से 15 हजार भोजन के तैयार करा रहा है. कलेक्टर का कहना है कि कई स्वयंसेवी संस्थाएं द्वारा खाना बंटवाने के कारण पूरे शहर में भीड़ इकट्ठा हो रही है. इसे रोकने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम और सभी टीआई को आदेश दिया गया है कि वे इस पर नजर रखें.

कलेक्टर ने होस्टल के संचालकों से कहा है कि जिन होस्टल में बच्चे हैं, उनके खाने पीने से लेकर पूरा ध्यान रखा जाए. यदि किसी हॉस्टल में बच्चों को परेशानी होती है तो होस्टल संचालक जिम्मेदार होगा. ऐसी ही व्यवस्था ठेकेदारों या मालिक को मजदूरों के लिए करना होगी.

Source : Agency