नई दिल्ली
वसंत पंचमी के दिन सिद्धि और सर्वार्थसद्धि योग जैसे दो शुभ मुहूर्त का संयोग बन रहा है। इस कारण पंडितों ने इसे वाग्दान, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत आदि संस्कारों और अन्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना है। ज्योतिषविदों का मानना है कि गुरुवार को वसंत-पंचमी मनाना श्रेष्ठ और शास्त्र सम्मत होगा। मेरठ के कंकरखेड़ा के बड़ा हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि वसंत पंचमी इस बार विशेष रूप से श्रेष्ठ है। वर्षों बाद ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति इस दिन को खास बना रही है। पंडित त्रिपाठी के अनुसार इस बार तीन ग्रह खुद की ही राशि में रहेंगे। मंगल वृश्चिक में, बृहस्पति धनु में और शनि मकर राशि में रहेंगे। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए ये स्थिति बहुत शुभ मानी जाती है।

वसंत पंचमी 30 को श्रेष्ठ :
इस वर्ष वसंत पंचमी को लेकर पंचाग भेद भी है। इसलिए कुछ जगहों पर ये पर्व  29 और कई जगह 30 जनवरी को मनेगा। विष्णुलोक के संस्थापक ज्योतिषविद विष्णु शर्मा और अधिकांश ज्योतिषविदों का मानना है कि उदयतिथि ही पूर्ण कालिक तिथि मानी जाती है। पंडित विष्णु शास्त्री के अनुसार, पंचमी तिथि बुधवार सुबह 10.46 से शुरू होगी, जो गुरुवार दोपहर 1.20 तक रहेगी। दोनों दिन पूर्वाह्न व्यापिनी तिथि रहेगी। ज्योतिषविद विभोर इंदुसुत के अनुसार, शास्त्रोक्त दृष्टि से वसंत पंचमी का पूजन सूर्योदय के समय प्रात:काल में ही किया जाता है, इसलिए जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित होती है, उसी दिन वसंत पंचमी का महत्व होता है। 29 जनवरी को पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित नहीं होगी, बल्कि मध्याह्न पौने ग्यारह बजे शुरू होगी, जबकि 30 जनवरी को सूर्योदय के समय से ही पंचमी तिथि उपस्थित रहेगी, इसलिए 30 जनवरी को वसंत-पंचमी मान्य और शास्त्र सम्मत होगा।


वसंत पचंमी 
- 10.46 बजे सुबह पंचमी तिथि बुधवार से शुरू होगी
- 01.20 बजे गुरुवार दोपहर तक रहेगी। दोनों दिन पूर्वाह्न व्यापिनी तिथि


ये भी विशेषता
वसंत पंचमी को मुहूर्त शास्त्र के अनुसार एक स्वयंसिद्धि मुहूर्त और अनसूज साया भी माना गया है अर्थात इस दिन कोई भी शुभ मंगल कार्य करने के लिए पंचांग शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार आरम्भ करना, सगाई और विवाह आदि मंगल कार्य किए जा सकते हैं।

इसलिए मनाई जाती है वसंत पंचमी
भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है। पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है, इसलिए यह ऋतु परिवर्तन का दिन भी है। इस दिन से प्राकृतिक सौन्दर्य निखरना शुरू हो जाता है। वसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है।

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