हमारे शरीर के प्रत्‍येक भाग और उसकी संरचना का जीवन में मिलने वाली सफलता-असफलता में बड़ा हाथ होता है। हस्‍तरेखा शास्‍त्र में इस बारे में काफी गहराई से बताया गया है। यानी कि अगर किसी को इसकी जानकारी हो तो वह हथेली की रेखाओं, उंगलियों की बनावट, उनकी दूरी और उन पर दर्ज निशानों से अपने या फिर दूसरे व्‍यक्ति के जीवन के बारे में विस्‍तृत रूप से जान सकता है। आज हम आपके साथ ऐसी ही जानकारी शेयर कर रहे हैं। जिसमें हाथ की छोटी उंगली यानी कि कनिष्ठिका के आकार और उसकी बनावट से काफी कुछ जान सकते हैं। अगर आपके मन में सवाल है कि ऐसा कैसे हो सकता है तो बता दें कि उंगल‍ियों का सीधा संबंध मस्तिष्‍क से होता है। यही वजह है कि यह हमारे व्‍यवहार को काफी हद तक निर्धारित और प्रभावित करती है।

कनिष्ठिका अनामिका के बराबर हो तो
हस्‍तरेखा शास्‍त्र के अनुसार, कनिष्ठिका उंगली अनामिका उंगली के बराबर हो तो यह शुभ संकेत होता है। कहा जाता है कि यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि व्‍यक्ति दार्शनिक प्रवृत्‍ति का है। इसके अलावा वह काफी बुद्धिमान भी होता है।

कनिष्ठिका और अनामिका की यह स्थिति हो तो
हस्‍तरेखा शास्‍त्र में बताया गया है कि कनिष्ठिका और अनामिका उंगली के बीच में अधिक स्‍पेस होना शुभ नहीं होता। यह इस बात को दर्शाता है कि व्‍यक्ति का स्‍वभाव अत्‍यंत क्रूर है। इसके अलावा वह आपराधिक प्रवृत्तियों में भी शामिल हो सकता है।
 
कनिष्ठिका और मध्‍यमा बराबर हों तो
यदि किसी व्‍यक्ति की कनिष्ठिका यानी कि छोटी उंगली और मध्‍यमा उंगली बराबर हो तो यह अत्‍यंत शुभ होता है। हस्‍तरेखा शास्‍त्र की मानें तो ऐसे व्‍यक्ति अपने काम को लेकर काफी समर्पित होते हैं। इसी के चलते इन्‍हें समाज में विशेष सम्‍मान प्राप्‍त होता है। इसके अलावा उसे विश्‍व स्‍तर पर प्रसिद्धि मिलती है।

कनिष्ठिका और मध्‍यमा के बीच ज्‍यादा स्‍पेस हो तो
हस्‍तरेखा शास्‍त्र के मुताबिक यदि किसी व्‍यक्ति की कनिष्ठिका और मध्‍यमा उंगली के बीच अधिक स्‍पेस होता है तो यह भी अच्‍छा संकेत होता है। ऐसे लोग स्‍वतंत्र विचार के होते हैं। यह हर तरह की रूढ़‍िवादिता से दूर रहते हैं। इसके अलावा यह अपनी बात किसी भी प्‍लेटफॉर्म पर रखने से नहीं डरते। इसी के चलते यह जीवन में नित नई ऊंचाईयों को छूते जाते हैं।

कनिष्ठिका उंगली अगर टेढ़ी हो तो
हस्‍तरेखा शास्‍त्र कहता है कि अगर किसी व्‍यक्ति की कनिष्ठिका उंगली टेढ़ी हो तो उसे टेंशन नहीं लेनी चाहिए। ऐसे लोग लाइफ में काफी कुछ अचीव करते हैं। यह कहानीकार हो सकते हैं। राजनीति के क्षेत्र में उच्‍च पद पर आसीन होते हैं। इसके अलावा यह साहित्‍य के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाते हैं।

कनिष्ठिका का पहला पोर अधिक लंबा हो तो
कहा जाता है कि कनिष्ठिका उंगली का पहला पोर अधिक लंबा हो तो ऐसे व्‍यक्ति जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं। इसके अलावा वह विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाते हैं। साथ ही खोजी प्रवृत्ति के होते हैं। इसका मन हमेशा अनुसंधान में ही लगा रहता है।

कनिष्ठिका का दूसरा पोर अधिक लंबा हो तो
हस्‍तरेखा शास्‍त्र के मुताबिक यदि किसी व्‍यक्ति की कनिष्ठिका उंगली का दूसरा पोर अधिक लंबा हो तो यह शुभ होता है। हस्‍तरेखा विद्वानों की मानें तो यह कोई भी व्‍यापार करें उसमें इन्‍हें सफलता ही सफलता मिलती है। इसके अलावा इनकी वाचनशैली अत्‍यंत प्रभावशाली होती है।

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