शनिदेव को न्याय के दाता या कर्म फल दाता कहा जाता है। इसका कारण ये है कि शनि देव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से ही फल प्रदान करते हैं। जिससे एक बात साफ़ होती है कि किसी भी व्यक्ति को इनसे अधिक डरने की ज़रूरत नहीं न ही सोचने की आवश्यकता है कि अगर ये अपनी चाल बदलेंगे तो आप पर इसका बुरा असर पड़ेगा। क्योंकि अगर आपके कर्म अच्छे हैं तो आपको इनसे किसी भी तरह से डरने की आवश्यकता नहीं है। परंतु फिर भी अगर आपको लगे कि आपकी कुंडली में शनि देव की बिगड़ी चाल से आपको कुप्रभावों को झेलना पड़ रहा है तो बता दें हमारे ज्योतिष शास्त्र मं कुछ खास उपाय बताए गए जिन्हें अपनाकर आप इनकी चाल को ठीक कर सकते हैं।

यहां जानें इन उपायों के बारे में..

  • माता-पिता का सम्मान करें तथा जितनी हो सके सेवा करनी चाहिए। अगर आप अपने माता-पिता से दूर रहते हैं तो मन ही मन हर दिन प्रणाम करें। ऐसा करने से शनिदेव आप पर प्रसन्न रहेंगे।
  • जिस जातक पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती चल रही हो उसे शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधकर ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करना चाहिए।
  • शनि देव से संबंधित दोष दूर करने के लिए शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करना चाहिए, इससे शनि के प्रकोप से बचाव होता है तथा सभी बाधाएं दूर होती हैं।
  • इसके अलावा कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करना भी लाभदायक माना जाता है। साथ ही साथ हनुमान जी को अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाना चाहिए।
  • शनि देव के कुप्रभावों से मुक्ति के लिए निम्न मंत्रका जाप भी किया जा सकता है।
  • 'सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।
  • मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।।'
  • अगर घर में किसी तरह का वास्तुप दोष हो तो घर में शमी का वृक्ष घर लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे वास्तुदोष दूर होगा तथा शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी।
  • प्रत्येक शनिवार को कर्म फल दाता शनि देव को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं तथा काले रंग की बाती एवं तिल के तेल से दीप जलाएं, इससे शनि महाराज की कृपा प्राप्त होती है।
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